Shakuntala Devi (Trailer) Review

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आपने सुना होगा कि, “चाचा चौधरी का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है” । यह एक काल्पनिक किरदार के बारे में कहा गया था।पर असल में एक भारतीय महिला का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है और उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

उनका नाम है “शकुंतला देवी” ।

इन्हीं के जीवन पर एक फिल्म बनी है (Biopic of Shakuntala Devi), जो कि अमेज़न वीडियो पर जल्द ही प्रदर्शित होने वाली है। इसमें शकुंतला देवी का किरदार मशहूर अदाकारा विद्या बालन ने निभाया है। इस का ट्रेलर लॉन्च हो चुका है।

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जानें "शकुंतला देवी" को :

ट्रेलर पर बात करने से पहले आइए शकुंतला देवी की प्रतिभा और उनके जीवन पर एक झलक डालते हैं। 

बेंगलुरु की शकुंतला देवी को मानव कंप्यूटर के नाम से भी जाना जाता है। विलक्षण प्रतिभा के साथ जन्मी शकुंतला की 3 वर्ष की उम्र में ही गणित के साथ मित्रता हो गई थी।

उनकी गणना करने की क्षमता कंप्यूटर और कैलकुलेटर से भी तेज थी। इसके लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guniss book of world records) में भी दर्ज है।

इम्पीरियल कॉलेज, लंदन (1980 ई.) में शकुंतला देवी ने दो 13 अंकों की संख्या को 28 सेकंड में गुणा करके दिखाया था। यह और भी उल्लेखनीय था क्योंकि इसका समाधान 26 अंकों का था जिसे दिलचस्प और अप्रत्याशित ढंग से पेश किया गया था।
इसके अलावा भी पूरी दुनिया में कई देशों में अपनी प्रतिभा को दिखाकर इन्होंने अपना और देश का नाम रौशन किया है।

इनकी प्रतिभा से यह भी साबित होता है कि मानव मन किसी भी कंप्यूटर से तेज और बेहतर काम कर सकता है।

मि. आर्थर जेन्सन जोकि बर्कले विश्वविद्यालय में शैक्षणिक मनोविज्ञान के प्रोफेसर थे (Mr. Arthur Jensen, professor of Educational Psychology University of Berkeley), उन्होंने शकुंतला देवी की गणना करने की प्रतिभा का गहन अध्ययन किया।

उन्होंने कहा की इनकी प्रतिभा ऐसी है कि मानो एक लेखक टाइपराइटर के keys के स्थान पर बिना ध्यान दिए लगातार लिखता जाता है। या फिर एक संगीतकार जोकि संगीत के बोल भी लिखता जाता है और उसी समय उसे सही सुर में गा भी देता है।

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Shakuntala Devi (Trailer) Review

विद्या बालन (Vidya Balan)और मैथमेटिक्स में क्या समानता (common) हो सकतीहै। जब जटिलताओं को सरलतम ढंग से प्रस्तुत किया जाए तो वह दिलचस्प लगती हैं। साथ में अगर उम्दा दर्जे का ड्रामा ऐड हो जाए तो प्रस्तुतीकरण और भी अमेजिंग हो जाती है।

शकुंतला देवी मूवी का ट्रेलर देखकर आपको कुछ ऐसी ही मिलती-जुलती फीलिंग्स आएगी। इस छोटे से ट्रेलर में शकुंतला गणित से खेलते हुए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness world record) तक पहुंच जाती है। एक परिवार है, जिसमें पति और बेटी है।

बेटी के पालन पोषण के बीच में मैथमेटिक्स आ जाता है। मैथमेटिक्स को दिलचस्प ढंग से पेश करने वाली शकुंतला का जीवन भी दर्शकों के लिए दिलचस्प लगेगा।

पर कहीं ना कहीं या ट्रेलर एहसास कराता है कि शकुंतला देवी के टैलेंट के ऊपर उसकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं हावी रहतीं है। और परिवार को जोड़ने के लिए जिन संवेदनाओं की जरूरत होती है उसका अभाव हो जाता है।

मूवी शकुंतला देवी अपने टैलेंट महत्वाकांक्षा परिवार को संतुलित कर पाती है, या कर पाती है कि नहीं , यह तो मूवी देखने के बाद ही पता चलेगा।

हमेशा की तरह विद्या बालन ने इस बार भी एक अलग और दिलचस्प कैरेक्टर को निभाने की जिम्मेदारी उठाई है। ट्रेलर के छोटे-छोटे क्लिप्स शकुंतला के आत्मविश्वास को उसकी आंखों की चमक, आकर्षक मुस्कुराहट और खनकती आवाज और प्रभावी बनाती हैं।

महिला अभिनेत्री और एक कलाकार के रूप में विद्या बालन ने फिल्म इंडस्ट्री में जो जगह बनाई है का क्षेत्रफल बढ़ाने में यह फिल्म सहयोग करेगी। कहना मुश्किल है कि दर्शकों को यह फिल्म कैसी लगेगी। पर दावा है कि फिल्म समीक्षकों की आंखें ट्रेलर देखकर ही चमकने लगी होंगी।

संवाद (Dialogues):

“शकुंतला देवी” में कहे गए कुछ डायलॉग्स उसके एटीट्यूड और कैक्टस को डिफाइन करने में सहायता करती हैं।

“मैथ्स में रूल्स नहीं हैं, सिर्फ जादू है”

“स्कूल तुझे क्या सिखाएगा, उल्टा तू स्कूल को ही सिखा देगी”

“मैंने एक आदमी को गोली मार दी थी,….. क्या हुआ, पोहा खाईए ना !! “

” I was correct, the computer was wrong ! “

“जब अमेजिंग हो सकती हूं, तो नॉर्मल क्यों बनूंगी ?” 

“We Indians are like that only…… Drama or nothing ! “

Q.What is it that you love about being on stage ?
A.People’s face, when they see a girl in choits (चोटी) doing maths.

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संक्षिप्त जीवनी (Shakuntala Devi Biography)

जन्म:- 04 नवंबर 1929.              मृत्यु  :- 21 अप्रैल 2013. (आयु 83 वर्ष). 

प्रारंभिक जीवन:

कर्नाटक के बेंगलुरु में जन्म (4 नवंबर 1929) लेने वाली शकुंतला देवी एक रूढ़िवादी ब्राह्मण परिवार से थीं। 3 साल की उम्र में उनके पिता ने कार्ड ट्रिक्स उठाने के दौरान शकुंतला की इस विलक्षण प्रतिभा को पहचाना था।

उनके पिता सर्कस में काम करते थे। बाद में वे रोड शो और स्टेज शो करने लगे, शकुंतला उनके साथ ही रहीं। बिना किसी औपचारिक शिक्षा के शकुंतला अपनी गणितीय गणना की क्षमता से लोगों को अचंभित कर देती थी। वह पिता के प्रदर्शन (shows) का आकर्षक हिस्सा बनीं रहीं।

6 साल की उम्र में उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय में अपनी विलक्षण अंकगणितीय क्षमता का प्रदर्शन किया। 1944 में, शकुंतला देवी अपने पिता के साथ लंदन चली गईं।

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क्षमता प्रदर्शन :

शकुंतला देवी ने 1950 में यूरोप के दौरे और 1976 में न्यूयॉर्क शहर में सहित अपनी अंकगणितीय प्रतिभाओं का प्रदर्शन दुनियाभर में किया।
शकुंतला एक गणितीय विलक्षणता थी, जिसमें संख्याओं को याद रखने की अदम्य क्षमता थी।

1980 में, इम्पीरियल कॉलेज ऑफ़ लंदन में, उन्होंने दो 13 अंकों की संख्या को केवल 28 सेकंड में सही ढंग से गुणा किया। करतब और भी उल्लेखनीय था क्योंकि इसका समाधान 26 अंकों का था जिसे दिलचस्प और अप्रत्याशित ढंग से पेश किया गया था।


संख्या-7,686,369,774,870 और 2,465,099,745,779 – एक कंप्यूटर द्वारा यादृच्छिक रूप से चुने गए थे, और उत्तर 18,947,668,177,995,426,462-773,730 है!
इसने उन्हें 1982 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के संस्करण में जगह दी। इसके अतिरिक्त, उसे “मानव कंप्यूटर” के रूप में भी जाना जाने लगा।

1960 के दशक के मध्य में, जब शकुंतला लंदन में प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं के लिए अपने गणितीय कौशल का प्रदर्शन करके घर लौटीं, तो उन्होंने कोलकाता के एक आईएएस अधिकारी परितोष बनर्जी से शादी की।

शकुंतला देवी ने अपनी पुस्तक “फिगरिंग: द जॉय ऑफ नंबर्स” में मानसिक गणना करने के लिए कई तरीके बताए।

1977 में, उन्होंने द वर्ल्ड ऑफ़ होमोसेक्सुअल लिखा, कहां जाता है यह भारत में समलैंगिकता पर पहला अध्ययन था।
वह 1960 के दशक के मध्य में भारत लौटीं और कोलकाता से भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी पारितोष बनर्जी से शादी की। 1979 में उनका तलाक हो गया था।

राजनीति में आजमाइशः

1980 में, उन्होंने मुंबई दक्षिण और तेलंगाना के मेडक से (वर्तमान में) एक स्वतंत्र के रूप में लोकसभा चुनाव में चुनाव लड़ा।
मेडक में वह इंदिरा गांधी के खिलाफ खड़ी थीं, वह 6514 वोटों (1.47% वोटों) के साथ नौवें स्थान पर रहीं। शकुंतला देवी 1980 के दशक की शुरुआत में बैंगलोर लौट आईं।

मृत्युः

अप्रैल 2013 में, शकुंतला देवी को सांस की समस्या के साथ बैंगलोर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दो सप्ताह में उन्हें हृदय और गुर्दे की जटिलताओं का सामना करना पड़ा।
21 अप्रैल 2013 को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। वह 83 वर्ष की थीं। उसकी बेटी अनुपमा बनर्जी हैं।

4 नवंबर 2013 को, शकुंतला देवी को उनके 84 वें जन्मदिन के अवसर पर Google Doodle से सम्मानित भी किया गया था।

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