पाताल लोक (Paatal Lok) Episode:02 on Amazon Video.

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Paatal Lok Episode 02: Lost and Found

IMDb 7.9/10
7.9/10

इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी अपने तरीके से फैमिली में सब कुछ ठीक करना चाहता है।

सुबह उठते ही अपनी ड्यूटी पर लग जाता है। अपने बेटे से घुलने मिलने की कोशिश में लगा हुआ है।

पर बेटा है कि सीधे मुंह बात नहीं करता। उसके मन को कुछ बातें हमेशा कचोटतीं रहतीं हैं।

जैसे उसके पिता का नाम “हाथी राम”। वह एक मॉडर्न स्कूल में पढ़ता है। उसे लगता है कि उसके पिता का नाम इसके प्रोफाइल में सूट नहीं करता।

उसे अपने पिता की सरकारी आउटडेटेड मारुति जीप्सी भी गर्व का अनुभव नहीं दे पाती है।

पत्नी भी बाप बेटे के बीच मध्यस्थता करते हुए अपने पति पर कुछ ना कुछ टीका टिप्पणी कर ही देती है।

इंस्पेक्टर अपने रूखे और ईमानदार व्यवहार के बावजूद खुद को संभाले रखता है।

और बड़े कम शब्दों में अपने बचपन की प्रताड़ना को जाहिर करके निकल जाता है।

घर की व्यवहारिक व्यवस्था को व्यवस्थित करके जैसे ही वह घर की दहलीज के बाहर कदम रखता है।

वैसे ही एक नया झमेला, उसका साला जीतू ,अपने साजो सामान के साथ आ धमकता है।

इंस्पेक्टर चौधरी की पारखी और अनुभवी निगाहें उसके साले की मंशा को समझने में देर नहीं लगाती है।

पर पत्नी की खुशियों की खातिर वह अपने साले के लिए वह सब करता है , जोकि उसके ओहदे, पर्सनैलिटी और स्वाभिमान को कतई मंजूर नहीं है।

फिर भी उसकी पत्नी अपने जुझारू और स्वाभिमानी पति के इस त्याग को काफी हल्के में लेती है।

घर संभालने के बाद इंस्पेक्टर अब केस और थाना को संभालने निकल पड़ता है।

थाने में विशाल त्यागी उर्फ “हथौड़ा त्यागी” से जानकारी उगलवाने के लिए उसे टॉर्चर किया जा रहा है।

45 हत्याएं करने वाले इस जघन्य अपराधी से इंफॉर्मेशन उगलवाने के लिए घिसे-पिटे तरीकों को अपनाया जा रहा है।

इधर इंस्पेक्टर हाथीराम इंक्वायरी के लिए उस होटल में पहुंचता है जहां वह चारों अपराधी ठहरे हुए थे।

उसके बाद वह थाने आता है और अपने तरीके से दूसरे अपराधी तोप सिंह से इंफॉर्मेशन निकालता है।

“सिंह साब” जोकि वर्तमान सरकार की राजनीतिक पार्टी का एक बड़ा नेता है, के बंगले पर पत्रकार संजीव मेहरा को समझाने और धमकाने की कोशिश जारी है।

सिंह साब उस चैनल का मालिक है जिसमें संजीव मेहरा सरकार की नाकामियों को दिखाता रहता है।

यह बात चैनल के मालिक को बिल्कुल पसंद नहीं है। संभवतः उस पर भी सरकारी दबाव है। और वह इस दबाव का प्रभाव संजीव मेहरा पर ट्रांसफर करता है।

 तीसरे अपराधी “कबीर M” से भी इंस्पेक्टर हाथीराम इंटेरोगेशन करके जानकारी निकालने में सफल रहता है।

इन छोटी-छोटी सफलताओं में उसका जूनियर सब इंस्पेक्टर इमरान अंसारी हमेशा उसके प्लानिंग में उसका साथ देता है।

इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी और सब इंस्पेक्टर इमरान एक जबरदस्त टीम की तरह काम कर रहे होते हैं। और एक दूसरे की काफी इज्जत भी करते हैं।

सब इंस्पेक्टर इमरान अंसारी हाथीराम चौधरी के अनुभव, डेडीकेशन और काम करने के तरीके से काफी प्रभावित है। और उसका फैन हो जाता है।

इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी भी अपने जूनियर साथी के स्मार्टनेस को काफी महत्व देता है।

साथ ही साथ उसके आईएएस बनने  के लक्ष्य को अपनी व्यक्तिगत खुशियों की लिस्ट में शामिल कर लेता है।

थाने में फैला धार्मिक नफरत का अवसाद भी, हिंदू हाथीराम चौधरी और मुस्लिम इमरान अंसारी को और करीब ले आता है।

वरिष्ठ पत्रकार संजीव मेहरा को चारों अपराधियों की शिनाख्त के लिए “थाना जमुना पार” बुलाया जाता है।

संजीव मेहरा से किसी और भी संभावित दुश्मनी के बारे में पूछा जाता है। तो वह बताता है कि सोशल मीडिया के कई लोग और ग्रुप उसे “एंटी नेशनल” बुलाते हैं।

यहां तक कि “संजीव मेहरा” को पाकिस्तान चले जाने की नसीहत तक दी जा चुकी है।

 

थाने से घर आते समय हाथी राम चौधरी अपनी सरकारी जिप्सी लेकर अपने बेटे सिद्धार्थ को रिसीव करने उसके स्कूल पहुंच जाता है।

बेटे को अपने पिता की यह हरकत काफी बेवकूफाना लगती है।

उसे लगता है कि उसे अगर कोई उसके पिता के साथ सरकारी जिप्सी बैठा हुआ देख लेगा तो, उसके इज्जत पर बट्टा लग जाएगा।

बेटा अपने इस्पेक्टर पिता को चकमा दे कर वहां से निकल लेता है।

 

संजीव मेहरा अपनी ऑफिस की यंग महिला जर्नलिस्ट सारा को अपराधियों के बारे में जानकारी निकालने के लिए उसे थाने में भेजता है।

जर्नलिस्ट सारा स्मार्ट है। उसे मालूम है कि थाने से इंफोर्मेशन कहां से निकाला जा सकता है।

वो सीधे थाने की महिला पुलिस को पटाती है। जो कि, खाली समय का सदुपयोग करते हुए थाने में ही घर के लिए सब्जी काट रही होती है।

इंफॉर्मेशन शेयर करने के लिए सारा संजीव मेहरा को अपने घर पर बुलाती है।

संजीव मेहरा को सारा से अपराधियों के बारे में संभावित जानकारी मिलती है।

वह सारा से अपराधियों के कारण होने वाले मानसिक प्रभाव के अनुभव को शेयर करता है।

सारा शुरू से ही संजय मेहरा की और आकृष्ट रही है।

सारा और संजीव यहां व्यक्तिगत और शारीरिक रूप से एक दूसरे में घुल मिल जाते हैं।

इंस्पेक्टर हाथी राम चौधरी अपने घर पहुंचता है । तो पाता है कि, उसका साला उसकी पत्नी को ठगने के अगले स्टेप पर पहुंच चुका है।

पिता हाथीराम चौधरी को अपने बेटे से काफी उम्मीदें हैं। और बेटा सिद्धार्थ है कि आस-पड़ोस के लंपटों की संगत में बहकता ही जा रहा है।

इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी थाना प्रभारी की इच्छा के विरुद्ध, विशाल त्यागी उर्फ हथौड़ा त्यागी का बैकग्राउंड खंगालने के लिए चित्रकूट निकल जाता है।

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