पाताल लोक (Paatal Lok) Episode 09: Swarg ka Dwaar

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Paatal Lok E-09: Swarg ka Dwaar on Amazon Video

फ्लैशबैकः
गांव में विशाल त्यागी का जन्म होता है। पंडित जन्मपत्री देखकर उसके पिता को बताता है। कि यह असुर की जन्मपत्री है।

और दैत्य हिरण्यकश्यप की पत्री से मेल खाती है। पंडित यह भी बताता है कि, विशाल त्यागी की मृत्यु हिरण्यकश्यप की मृत्यु की शर्तों पर ही होगी।

ग्वाला गुज्जर के आदमी हाथीराम चौधरी को जिस गाड़ी से ले जा रहे हैं उसका एक्सीडेंट हो जाता है।

एक्सीडेंट में कोई हताहत नहीं होता। हाथी राम भागते-भागते गांव के मेले में पहुंचता है। ग्वाला गुर्जर के आदमी अभी भी उसके पीछे हैं।

जानलेवा उछल कूद, और खुद को शारीरिक चोट पहुंचाने के बाद भी हाथीराम फिर से गिरफ्त में आ जाता है।

हाथीराम को जंगल में ग्वाला गुज्जर के सामने लाया जाता है। हाथीराम चौधरी सारा सच और षड्यंत्र ग्वाला गुज्जर के सामने खोल कर रख देता है।

ग्वाला गुज्जर अपने मितृ सरदार “दोनलिया” की रुद्राक्ष माला विशाल त्यागी को सौंपने के लिए हाथीराम को दे देता है। फिर हाथीराम को उसके सारे सामान सौंप कर उसे आजाद कर देता है।

संजीव मेहरा के दफ्तर में उसके न्यूज़ चैनल के नए मालिक और मैनेजमेंट के स्वागत में पार्टी हो रही है। चैनल का नया मालिक विक्रम कपूर और संजीव मेहरा एक दूसरे का आलिंगन करते हैं।

संजीव मेहरा की सबसे करीबी पत्रकार सारा, संजीव मेहरा को अपना इस्तीफा सौंपती है।

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हाथीराम जख्मी हालात में सीधे संजीव मेहरा के दफ्तर पहुंचता है। षडयंत्र की सारी कहानी बताते हुए यह भी बताता है। कि, कैसे उसकी पत्नी का “कुत्ताप्रेम” उसकी जान बचाता है।

यह सारी बातें सारा के सामने होतीं हैं। संजीव मेहरा सारा को समझाता है कि वह यह बात बाहर उजागर न करे।

सारा संजीव को उसके कर्मों की याद दिलाती है। वह मुस्कुराती है, और यह कहते हुए दफ्तर से बाहर निकलती है की,

“I want you to live with the knowledge that if I want, I can do to you exactly what you did to those four guys.”

मतलबः तुम्हें मालूम होना चाहिए कि, मैं तुम्हारे साथ ठीक वही कर सकती हूं, जो तुमने उन चारों के साथ किया है।

संजीव मेहरा घर पहुंचता है। कुत्ते के बच्चों के साथ खेलती हुई पत्नी को धन्यवाद देता है। पत्नी कुछ समझ नहीं पाती, और फिर से कुत्ते के साथ खेलने लगती है।

मीडिया को छोड़ दें तो, हाथ ही राम चौधरी अब उस हर जगह फेमस हो गया है। जहां-जहां से साजिशों के तार जुड़े हुए थे।

हाथीराम चौधरी अपने थाने पहुंचता है। उसका सीनियर बाइज्जत उसको उसका सर्विस पिस्तौल, गाड़ी की चाबी और बाकी चीजें सौंपता है।

थाने में डीसीपी भगत और हाथीराम चौधरी के बीच वार्तालाप होती है। डीसीपी भगत उसे नौकरी से ना निकालने का कारण बताता है।
हाथीराम चौधरी भी इसका जवाब अपने तरीके से देता है।

अपनी पीसीआर वैन (पुलिस की गाड़ी) में, सबसे निकटतम मित्र इमरान अंसारी को बिठाकर (ज्यादा डिस्टर्ब ना करते हुए) , उसको यूपीएससी के साक्षात्कार केंद्र तक छोड़ता है।

हाथीराम को अंसारी से काफी उम्मीदें हैं। अंसारी को छोड़ने के बाद हाथीराम कोर्ट में पहुंचता है।

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त्यागी के हाथ में दोनलिया का रुद्राक्ष-माला सौंपता है। त्यागी को सब समझ में आ जाता है।

अपने एकमात्र रक्षक और गुरु के मौत के निधन का आघात, विशाल त्यागी बर्दाश्त नहीं कर पाता है। विशाल पुलिस की पिस्तौल छीन कर हाथीराम के समक्ष खुद को गोली मार लेता है।

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हाथीराम एक जांबाज और विजेता योद्धा की तरह अपने घावों के साथ घर में दाखिल होता है।

पत्नी भी प्रेम,आंसू और भावुकता से लथपथ अपने पति का स्वागत करती है। दोनों में पति-पत्नी जैसा प्रेममयी तकरार और संवाद होता है।

सीरीज़ का मुख्य किरदार , हाथीराम चौधरी एक आदर्श दोस्त, पति, पिता और अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए अपनी नौकरी और जान को दांव पर लगाने वाला योद्धा है।

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हाथीराम धरती लोक का योद्धा है। जो अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए स्वर्ग लोक और पाताल लोक को एक कर देता है।

इस सीरीज़ का हर एक एपिसोड फ्रेश कंटेंट से भरा पड़ा है। हर एक किरदार अपनी भूमिका बखूबी निभाता हुआ दिखता है। लेखन और निर्देशन उम्दा और विश्वस्तरीय है।

आप सीरीज के अंदर की घटनाओं को देश में घट रही घटनाओं से जोड़ने लगेंगे। कई किरदार तो आपको वर्तमान के लोकप्रिय व्यक्तित्व से प्रेरित दिखेंगे।

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