पाताल लोक (Paatal Lok) Episode 07: Badlands

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Episode 07: Badlands

IMDb 7.7/10
7.7/10

फ्लैशबैकः

रहस्यमय दस्यु दोनलिया (मास्टर जी) बीमार है, जंगल में किसी अनजान जगह पर है। ग्वाला गुर्जर एक डॉक्टर को पकड़कर के इलाज के लिए लाता है।

डॉक्टर, दोनलिया को बिस्तर पर पड़ा हुआ देखते ही हाथ जोड़कर घुटनों के बल बैठ जाता है।

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पिछली कुछ घटनाओं के बाद सस्पेंडेड इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी का कद उसकी पत्नी और उसके बेटे की नजर में काफी ऊंचा हो गया।

हाथीराम चौधरी ने यह साबित किया है कि, वह अपनी जिम्मेदारियों के प्रति कितना ईमानदार और संवेदनशील है।

पति को थप्पड़ लगाने के बाद पत्नी का सीधे-सीधे पति से बात करना थोड़ा मुश्किल तो होगा ही। तो पति के निर्णय का वजन रखते हुए, पति की उपस्थिति में, पत्नी अपने भाई को जमके खरी-खोटी सुनाती है।

बेटा अपने पिता की हर संभव मदद करने को उतारू है। ऐसा लगता है, मानो उसने अपने पिता में कोई नया अवतार देख लिया हो।

जेल में, कबीर M की पहले ही हत्या हो चुकी है। महिला जैसी दिखने वाली चीनी का मानसिक शोषण होता है।

कुत्ता प्रेमी विशाल त्यागी एक कैदी द्वारा कुत्ते को प्रतारित करने के लिए बुरी तरह पीटता है। बाकी कैदी दहशत में हैं।

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सिंह साब के बंगले पर, संजीव मेहरा और विक्रम कपूर के साथ तीनों की मीटिंग होती है।

चैनल की टीआरपी के उतार-चढ़ाव को लेकर संजीव मेहरा यह एहसास दिलाता है कि, उसका चैनल की लोकप्रियता पर कितना नियंत्रण है।

सिंह साब, शराब पीते हुए यह बताता है। कि, वह संजीव मेहरा जैसे विचारधारा वालों से कितनी नफरत करता है।

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हाथीराम चौधरी फिर से चित्रकूट को निकलता है। पर इस बार उसका टारगेट विशाल त्यागी नहीं है ।

बल्कि, उससे जुड़े सूत्रधार स्पोर्ट्स टीचर, ग्वाला गुज्जर और बुंदेलखंड का रोबिन हुड कहलाने वाला “दोनलिया” (मास्टर जी) है।


हाथीराम चौधरी सस्पेंडेड है। उससे उसके हथियार थाने में जमा करा लिए गए हैं।

इमरान अंसारी अपनी नौकरी खतरे में डालकर हाथीराम चौधरी को अपना सर्विस पिस्तौल देता है।

अब इस सरकारी केस की तफ्तीश हाथीराम व्यक्तिगत रूप से कर रहा है। वह अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी और खर्चे से इस केस को सुलझाने पर आमदा है।

चित्रकूट स्टेशन से ही हाथीराम एक ऑटो किराए पर ले लेता है।
ऑटो वाले को काफी बाद में मालूम चलता है। की, वह एक सख्त शख्स के साथ है और सशक्त गिरोह के पीछे है।

हाथीराम चौधरी दोनलिया के मठ तक पहुंचता है। जहां वह जनता दरबार लगाया करता है।

दोनलिया अनुपस्थित है। उसकी गैरमौजूदगी में उसका दाहिना हाथ “ग्वाला गुज्जर” दरबार लगाने वाला है।

मठ के कैंपस में जमीन पर बैठे लोग ग्वाला गुज्जर का इंतजार कर रहे हैं। इन्हीं लोगों में हाथीराम चौधरी भी शामिल हो जाता है।

किसी कारणवश ग्वाला गुर्जर दरबार में उपस्थित जनता को संबोधित नहीं कर पाता है। अब तक भीड़ में बैठा हाथीराम चौधरी, ग्वाला गुज्जर के लोगों की नोटिस में आ चुका है।

ग्वाला गुज्जर की गाड़ी मठ से निकलती है। हाथीराम चौधरी का ऑटो उसका पीछा करती है। ग्वाला गुज्जर घाट (नदी) किनारे किसी का श्राद्ध कर्म (शायद दोनलिया का) कर रहा है।

हाथी अभी नजर रखे हुए है। गुज्जर के गुंडों को इसकी भनक लग जाती है। हाथीराम चौधरी को भागना पड़ता है और गुंडे उसके पीछे हैं।

इसी बीच डीसीपी भगत का फोन आता है। वह उसे बताता है, कि उसका सीनियर “विर्क” उसपर पर विभागीय अवज्ञा का आरोप लगा रहा है।

डीसीपी भगत, हाथीराम को आगाह करता है कि वह पहले से निलंबित है। और अब उसकी नौकरी भी जा सकती है।

हाथीराम चौधरी की प्रतिक्रिया:-

” सर आधी जिंदगी बाप की आंखों में देखा है कि उसका बेटा failure है। बाकी की जिंदगी बेटे की आंखों में नहीं देखना चाहता कि उसका बाप failure है।”

उपरोक्त स्टेटमेंट के साथ एपिसोड समाप्त होता है। आगे के एपिसोड्स में हाथीराम के साथ और भी अप्रत्याशित घटनाएं घटित होती हैं।

 

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