छिछोरे (Chhichhore) Movie Review

Chhichhore-parents-in-hospital
IMDb 8.1/10
8.1/10

एक परिचय (Intro) :

अगर आपको “तारे जमीं पर” और “3-इडियट्स” जैसी फ़िल्में पसंद आई हों तो यह फिल्म भी आपको जरूर देखनी चाहिए।

बच्चे की परवरिश एक बहुत ही महत्वपूर्ण और नाजुक जिम्मेदारी है। इसमें बच्चे की स्वतंत्रता छीने बगैर माता पिता को उनके जीवन में एक ईमानदार पथ-प्रदर्शक के किरदार में काम करना पड़ता है।

“माता पिता बच्चे को जन्म देते हैं तो इसका मतलब यह नहीं की उनके पूरे जीवन पर उनका ही अधिकार हो” यह फिल्म इन्हीं गलतफहमीयों को दूर करने की दिशा में एक प्रयास है।

इसके अलावा इस फिल्म में अभिभावक अपने जीवन के रोचक प्रसंगों को अपने बेटे के साथ साझा करते हैं जिससे अभिभावक और बेटे में एक मित्रता पूर्ण संबंध स्थापित होता है।

बचपन से बुढ़ापे तक जीवन के कई चरण होते हैं। कॉलेज और हॉस्टल में बिताया गया समय भी जीवन के अंत तक जीवन को प्रभावित करता रहता है।

आर्टिकल के अंत में फुल मूवी फ्री (Full movie FREE) में देखें। 

Chhichhore-hostel-challange

Chhichhore full movie review:

हॉस्टल में जीवन की शुरुआत जैसे भी हो। पर हॉस्टल में बने दोस्तों से इतनी घनिष्ठता हो जाती है कि कठिन वक्त में हम सबसे पहले उन्हें ही याद करते हैं।

कॉलेज के दिनों में बने संबंध कैसे जीवन भर साथ निभाते हैं और एक दूसरे को समय-समय पर सपोर्ट करते रहते हैं।

कॉलेज और हॉस्टल मैं बिताए गए कालखंड के दौरान छात्र खुद को एक सामाजिक इंसान के रूप में खुद को डिस्कवर करता है।

Chhichhore-hostel-sushant-singh-raajput-2

इस फिल्म में और भी कई अप्रत्याशित प्रसंग आपको देखने को मिलेंगे जो दिलचस्प और रोमांचक होते हुए भी पारंपरिक मसाला फिल्मों से काफी अलग टेस्ट देतीं हैं।

यह फिल्म शुरू से अंत तक ड्रामे से भरी पड़ी है। यदि आपने हॉस्टल में अपना जीवन बिताया है तो किसी न किसी किरदार से आप खुद को जोड़ ही लेंगे।

बुढ़ापे के मेकअप कर थोड़ा कम काम किया गया है पर एक्टिंग और डायलॉग डिलीवरी को देखकर आप इसे नजरअंदाज कर देंगे।

“हिंदीजागरण” की टीम इस फिल्म को देखने के लिए स्ट्रांग्ली रिकमेंड करती है।

आर्टिकल के अंत में फुल मूवी फ्री (Full movie FREE) में देखें। 

Chhichhore-movie-champions

विश्लेषण :

यह फिल्म आपको लूजर (loser)और विनर(winner) में फर्क करना सिखा सकती है।

आपको एहसास होगा कि कैसे पारंपरिक अपेक्षाएं किसी सक्षम युवा को तनावग्रस्त कर उसके प्रगतिशील स्वतंत्र जीवन को छिन्न-भिन्न कर सकती है।

अक्सर देखा जाता है कि माता पिता बच्चों को यह एहसास दिलाते रहते हैं। की उनके जीवन की एक मोटी कमाई अपने बच्चे के ऊपर लगा रखी है। अतः बच्चों का कर्तव्य है कि वह माता-पिता की अपेक्षाओं पर खड़े उतरें।

इस क्रम में माता पिता अपने बच्चों को अपना कर्जदार बनाते हैं। और बदले में खुद के द्वारा तय किए गए लक्ष्यों को पाने का बच्चों पर दबाव डालते हैं।

जाने अनजाने अभिभावक अपने बच्चों पर अपनी महत्वकांक्षी अपेक्षाओं का बोझ डालते रहते हैं। बच्चे भी मानसिक दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करते हैं।

माता पिता अपने बच्चे से प्रेम जरूर करते हैं। लेकिन वह उनसे वैसी अपेक्षाएं रखते हैं जिससे कि समाज में वह बच्चों के सफलताओं की कहानियां सुना सकें और खोखली वाहवाही लूट सकें।

बच्चों की व्यक्तिगत क्षमताओं और इच्छाओं को समझे और जाने बगैर उनकी तुलना दूसरे बच्चों से करने लगते हैं।

इन सब का परिणाम यह होता है की बच्चे के साथ जन्मी उनकी प्राकृतिक क्षमताओं का विकास नहीं हो पाता है।

और वह उन कुशलताओं को प्राप्त करने में अपना समय व्यतीत करते हैं। जो उनके लिए बिल्कुल भी बने नहीं होते।

इन तनावपूर्ण वातावरण में बच्चे खुद की रुचि से समझौता करके जीवन में आगे तो बढ़ जाते हैं। पर अंततः वह जीवन अपूर्ण और असंतुष्ट साबित होता है।

इस फिल्म की अच्छी बात यह है कि माता पिता अपने बच्चे को खोने से पहले उन्हें अपनी गलतियों का एहसास हो जाता है।

और बच्चे के ऊपर से अपनी आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं का बोझ उठा लेने का मौका मिलता है।

Chhichhore-movie-achievers-7stars

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *